स्काउट में कम्प्यूटर व मोबाइल का प्रयोग

स्काउट में कम्प्यूटर का प्रयोग

कम्प्यूटर का आविष्कार 1837 में इंगलिश पॉलीमैथ (गणितज्ञ) दार्शनिक, अन्वेषक और यान्त्रिक इंजीनियर चार्लस् बैबेज (Charles Babbage) ने किया। इसलिये उन्हें कम्प्यूटर का जनक (Father of Computer) कहा जाता है।
कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो आंकड़े (Datas) और निर्देशी (Instructions) को प्राप्त करता है। कम्प्यूटर के आविष्कार से संचार जगत को एक नई दिशा मिली है।

अनेक कार्यों को एक सेकण्ड में कर डालने वाला कम्प्यूटर आज हमारे जीवन का प्रमुख हिस्सा बन गया है। कम्प्यूटर द्वारा गणना करना सरल और त्वरित हो गया है। यह गणना ही नहीं करता वरन बैंक, कार्यालयों, शिक्षा, अन्वेषण और चिकित्सा विज्ञान में भी क्रांतिकारी कार्य कर रहा है।

कम्प्यूटर मनुष्य से तेज काम करता है। इसके परिणाम शत-प्रतिशत सही होते हैं। मनुष्य की भांति यह कभी भी धकावट अनुभव नहीं करता, क्योंकि इसके पास अपना मास्तिष्क नहीं है। यह अनेक कार्य करने में सक्षम हैं। जैसे-तकसंगत समस्यायें, गणितीय गणना कार्य, ई-मेल भेजना, चित्र बनाना आदि।

कम्प्यूटर तभी कार्य करता है, जब प्रोग्राम में किसी प्रकार की त्रुटि न हो, अन्यथा यह कार्य नहीं करेगा, यह इसकी एक त्रुटि है।

कम्प्यूटर के सभी पार्ट्स (जिन्हें हम छू सकते हैं) हार्डवेयर के अंतर्गत आते हैं। .
सॉफ्ट वेयर में वे सभी कार्य आते हैं। (जिन्हें हम छू नहीं सकते), जैसे- Programs, Procedure, Documentation, Processing, Outputting आज कल बच्चा-बच्चा कम्प्यूटर के बारे में जानता है। क्योंकि प्रारंभिक कक्षाओं से ही इसे शिक्षा का अभिन्न अंग बना दिया गया है। अतः प्रत्येक स्काउट गाइड को भी इसका ज्ञान होना अत्यावश्यक है।

मोबाइल बैंकिंग

जब हम घर से दूर हो, और हमें अपने बैंक खाते की जानकारी या किसी परिजन दोस्त को पैसे भेजने हों या किसी तरह का बिल जमा करना हो, तो कभी भी चौबीसों घंटे विभिन्न बैंको के द्वारा मोबाइल बैंकिंग की सेवा शुरू की गई है। यह सेवा पूरी तरह सरल सुक्षित तथा सुविधापूर्ण है। जिसका उपयोग कभी भी कहीं भी किया जा सकता है।

मोबाइल बैंकिग की सेवा का लाभ दो तरीकों से प्राप्त किया जा सकता है।
1. मोबाइल बैंकिंग सेवा अप्लीकेशन वैप द्वारा।
2. मोबाइल बैंकिग सेवा एस. एम. एस. (SMS) द्वारा
यह सेवा वैप (WAP) के जरिये सभी मोबाइल में GPRS के साथ उपलब्ध है। साथ ही मोबाइल बैकिंग का अप्लीकेशन जावा, ब्लैकबेरी, एंड्रॉयड, आई-फोनस और विंडो मोबाइल फोन के लिए उपलब्ध है। मोबाइल बैकिंग अप्लीकेशन और वैप में निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध है।
1.राशि (धन) हस्तांतरण
2. तुरंत भुगतान सेवा
3. पूछताछ सेवाएँ
4. डिमेट एकाउंट सेवा
5. अनुरोध सेवाएँ
6. बिल भुगतान
7. मोबाइल, डिस टी. वी. अथवा मोवीकैश इत्यादि रिचार्ज सेवा
8. अन्य भुगतान (व्यापार भुगतान, जीवन बीमा भुगतान)

मोबाइल बैकिंग सेवा एस. एम. एस. पर


यह सेवा सभी फोन पर उपलब्ध होती है। सम्बन्धित बैंक को एस. एम. एस. भेजकर निम्नजानकारियाँ प्राप्त कर सकते है।
1. पूछताछ सेवा
2. रिचार्ज सेवा
3. एम. पिन में बदलाव

4. डी. टी. एच. रिचार्ज
सभी बैकों में अलग-अलग सुविधाएँ उपलब्ध होती है तथा इन सुविधाओं इस्तेमाल करने से पहले बैंकों के द्वारा जारी नियमवाली को अच्छी तरह से पढ़ लेना चाहिए।


मोबाइल बैंकिंग सेवा यू. एस. एस. डी. पर

यह सेवा सी. डी. एम. ए. फोन को छोड़ कर बाकी सभी फोन में उपलब्ध होती है। इसमें अप्लीकेशन को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के अनुसार ‘595 को डायल कर यह सेवा ले सकते है । यू. एस. एस. डी.पर निम्न सेवाएं उपलब्ध है।
1. पूछताछ सेवा
2. मोबाइल रिचार्ज
3. राशि हस्तांतरण


सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य बातें:-

1. बैंक के द्वारा निर्गत पिन को सुरक्षित रखें।
2. अधिकृत मोबाइल बैंकिंग साफ्टवेयर डाउनलोड करें।
3. मोबाइल को पासवर्ड के द्वारा बन्द करके रखें। जब मोबाइल इस्तेमाल में न हो।
4. मोबाइल बैंकिंग अप्लीकेशन को इस्तेमाल के बाद लॉग आउट कर देना चाहिए।

5. अगर मोबाइल सिम खो जाये तो मोबाइल बैंकिंग सर्विस पंजीयन को तुरंत रद्द करा दें।
6. मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने से पूर्व और अधिक जानकारी हेतु नजदीकी संबंधित बैंक शाखा से सम्पर्क अवश्य करें।

इन्टरनेट बैंकिंग

इन्टरनेट बैंकिंग आज के आधुनिक युग में बैंक के सारे काम को घर या ऑफिस में करने का सबसे आसान एवं सरल तरीका है। इससे हम लाइन में खड़ा होने तथा देरी से बच सकते है। सरल एवं सुरक्षित इन्टरनेट बैंकिंग का बेजोड़ ऑनलाइन बैकिंग है। इन्टरनेट बैंकिंग के जरिये हम बैंक खाते से संबंधित सभी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं।


इन्टरनेट बैंकिंग


1. व्यक्तिगत बैंकिंग (Personal Banking)

2. कॉरपोरेट बैंकिंग (Corporate Banking)


व्यक्तिगत बैंकिग:- हमारी इन्टरनेट बैंकिंग व्यक्तिगत बंकिंग की सारी सुविधा उपलब्ध कराती है।
सुविधाः
1. हमारे आई. एन. वी. सुविधा में रुचि।
2. ऑन लाइन जीवन बीमा प्राप्त करना।
3. आवश्यक बिल जमा होना (मूल्यांकित सेवा)
4.कर भुगतान
5. स्टेट बैंक वरचूवल कार्ड
6. असबा (ASBA) सुविधा
7. राशि हस्तांतरण
8. खाता विवरण
9.निवेश सेवाएँ
10. अनुरोध सेवाएँ

कॉरपोरेट बैंकिंग:- कोरपोरेट बैकिंग हमें प्रशासनिक तथा अव्यक्तिगत ऑन लाइन बैंक खाते की सुविधा उपलब्ध कराती है।
सुविधा:-
1. ऑनलाइन शुल्क जमा
2. प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, सरकारी कर एवं ई. पी. एफ. भुगतान ऑनलाइन
3. अनुरोध सेवाएँ
4. मूल्यांकित सेवाएँ
5. निवेश संबंधी सेवाएँ
6. खाता विवरण
7. प्रबन्धन की जानकारी
8. राशि हस्तांतरण


आप बैंक में भरा हुआ आवेदन पत्र जमा करा कर इन्टरनेट बैंकिंग की सुविधा का लाभ उठा सकते है। बैंक अपने ग्राहक को अपना खाता लॉग ऑन करने हेतु पासवर्ड पिनकोड गुप्त अंक उपलब्ध कराती है। ग्राहक को अपने पासवर्ड पिन कोड गुप्त अंक दूसरों को नहीं बताने चाहिए। ग्राहक को चाहिए कि अपनी बैंक की वेबसाइट विजिट करें एवं यूजर आई. डी. प्राप्त कर इन्टरनेट बैंकिंग सुविधा को सक्रिय करावें।

मोबाइल फोन दैनिक संचार व्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। प्रत्येक मोबाइल फोन में बातचीत तथा संदेश भेजने की क्षमता होती है। जानकारी भेजना, मोबाइल में सुरिक्षत करना एक अभेद्य तरीका है। मोबाइल फोन से लोकेशन का भी पता चलता है।

आज के आधुनिक युग में मोबाइल फोन संचार व्यवस्था का सबसे सरल सुगम साधन है जो आसानी से हर गली-मुहल्ले-चौक-चौराहे में उपलब्ध होता है। मोबाइल फोन को भ्रमणि श्रवित यंत्र अथवा सचल दूरभाष यंत्र भी कहते है।

मोबाइल फोन को सर्वप्रथम 1940 में विकसित किया गया। 1908 में प्रो. अल्बर्ट झांके तथा दि ओकलैण्ड ट्रांसकौंटीनेन्टल एरियल टेलीफोन और पावर कम्पनी ने दावा पेश किया कि उन्होंने बेतार टेलीफोन विकसित किया है। मोबाइल फोन का प्रचालन कृत्रिम उपग्रह के द्वारा होता है। शुरुआत में मोबाइल फोन की सेवा टेलीफोन के रूप में विकसित होकर आज 3 जी, 4 जी तक चली गई है। शुरू में जी यानि मोबाइल टेलीफोन सर्विस (MTS) तत्पश्चात “इम्प्रूव्ड मोबाइल टेलीफोन सर्विस’ से हुई। इसके बाद एनालॉग सेल्यूलर नेटवर्क 1जी, डिजिटल सेल्यूलर नेटवर्क 2 जी, ब्राडबैंड द्वारा-3 जी तथा नेटिव आई.पी. नेटवर्क-4 जी आया।

भारत के साथ-साथ विश्व में मोबाइल बनाने की अनेक कम्पनियाँ हैं। जैसे मोटोरोला, नोकिया, सैमसंग, लावा, सोनी इरीक्सनल, ब्लैकबैरी, एल.जी। ये मोबाइल सेलूलर नेटवर्क कम्पनी से जारी सिम कार्ड के द्वारा संचालित होता है। प्रत्येक नेटवर्क कम्पनी का आकृति-विस्तार (Frequence Range) नेटवर्क घेरा (Cellradius) तथा नेटवर्क क्षेत्र (Cell Area) अलग-अलग निर्धारित होती है। इस घेरे से बाहर जाने पर रोमिंग शुरू हो जाती है। सभी नेटवर्क एक दूसरे से जुड़े होते है। भारत में बी. एस. एन.एल., एम. टी. एन. ए ल. आइडिया, रिलायन्स, वोडाफोन, टाटा इण्डिकॉम, डोकोमो इत्यादि मोबाइल फोन नेटवर्क कम्पनी है।

दिन-प्रतिदिन नये नये आकार प्रकार के मोबाइल फोन, मोबाइल कम्पनियां बना रही है। जिससे हमारे रोजमर्रा के काम सेकेण्डों में हल हो जाते है। आज हम मोबाइल से किसी से बातचीत एप संदेश, ई-मेल, बैंकों के काम कर सकते है। मोबाइल से आवश्यक जानकारी भी डाउनलोड कर या भेज सकते है। यह निमः करता है, हमारे मोबाइल फोन पर कि उनमें कितनी सुविधाएं हैं। आज एक मोबाइल की कीमत रुपये 1000/- से लेकर रुपये 25000/- या रुपये 30000/- या उससे ज्यादा है।

मोबाइल फोन उपयोग करते समय सावधानियाँ:-

अनेकानेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के सुझाव से अत्याधिक या बेवजह मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से मनुष्यों में कैंसरकारी प्रभाव होता है। परन्तु अभी तक इसका कोई वास्तविक साक्ष्य नहीं मिल पाया है। इसलिए इसके इस्तेमाल कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

1. बच्चों को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने हेतु नहीं देना चाहिए केवल आपातकालीन स्थिति छोड़कर।

2. जब हम बातचीत कर रहे हों तो कोशिश करें कि फोन आपके शरीर से जितना हो सके दूर रहें।

3.फोन वैसे स्थान जैसे बस, ट्रेन, मेट्रो इत्यादि में उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि आपके मोबाइल फोन से विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र प्रदर्शित होती है।

4. हमेशा अपने शरीर में मोबाइल फोन रखने से बचना चाहिए। रात में सोने के समय शरीर के नजदीक तकिये के नीचे नहीं रखना चाहिए विशेष रूप से गर्भवती महिला के पास । मोबाइल को “फ्लाइट या ऑफ लाइन’ मोड में रखने से विद्युत चुम्बकीय उत्सर्जन को रोक सकते है।

5. अगर आप मोबाइल फोन लेकर चल रहे हों तो की पैड को अपने शरीर की ओर तथा बैक को शरीर से बाहर की तरफ रखें।

6. मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल क्षणिक बातचीत हेतु करें लम्बी बातचीत हेतु टेलीफोन का इस्तेमाल न करें।

7. अगर नेटवर्क सिग्नल कमजोर हो तो या चलती ट्रेन, बस इत्यादि में बातें न करें। क्योंकि इसकी शक्ति (Power) स्वतः बढ़ जाती है और दूसरे एन्टीना से जुड़ जाती है।


स्वचालित गणक मशीन (ATM) के बारे में जानकारी

स्वचालित गणक मशीन जिसे अंग्रेजी में ओटोमेटिक टेलर मशीन तथा लघु रूप में ए.टी.एम. को आटोमेटिक बैंकिग मशीन, कैश पाइंट, होल इन द बॉल, बैनकोमंट जैसे नामों से यूरोप, अमेरिका, रूस में जाना जाता है । यह मशीन एक ऐसा दूरसंचार नियंत्रित व कम्प्यूटरीकृत उपकरण है जो ग्राहकों को वित्तीय हस्तांतरण से जुड़ी सेवाएँ ATM उपलब्ध कराता है। इस हस्तांतरण प्रक्रिया में ग्राहक को कैशियर क्लर्क या बैक टैलर की मदद की आवश्यकता नहीं होती। खुदरा यानि रिटेल बैंकिंग के क्षेत्र में ए. टी. एम. बनाने का विचार समानांतर तौर पर जापान, स्वीडन, अमेरिका और इग्लैण्ड में जन्मा और विकसित हुआ। वर्तमान ए. टी. एम. मशीन इंटरनेट बैंक नेटवर्क से जुड़ा होता है। यह नेटवर्क पी यू एल एस ई, पी एल यू एस आदि नामों से जाने जाते है।

इस आधुनिक युग में ए. टी. एम. का प्रयोग लोगों की दिनचर्या का अहम अंग बन गया है अत एवं ए. टी. एम. प्रयोग करते समय कुछ सावधानियाँ आवश्यक है।

स्वचालित गणक मशीन का संचालन:-

ए. टी. एम. के संचालन हेतु संबंधित बैंक आपको एक एटीएम कार्ड देता है। एटीएम कार्ड के साथ बैंक ग्राहक को पिन कोड (गुप्त अंक) देता है। जिसकी मदद से पैसा निकाला जाता है। ए. टी. एम. मशीन दो प्रकार की होती है। पहला जिसमें ए.टी. एम. कार्ड मशीन के अन्दर चला जाता है तथा कार्ड उपयोग के बाद बाहर आता है। दूसरा मशीन जिसमें कार्ड को केवल अन्दर डालकर बाहर निकाला जाता है।

संचालन:-
1. सबसे पहले ए.टी. एम. कार्ड को मशीन में डालते है तथा कुछ सेकण्ड के बाद वापस बाहर खीच लेते है। (किसी किसी ए. टी. एम. में स्वतः अन्दर चला जाता है। प्रत्येक ए. टी. एम. में कार्ड डालने का सुनिश्चित स्थान होता है ।।
2. आवश्यकतानुसार किसी एक का चयन करें- 1.Service (सवा), 2. Banking (बैंकिंग, पैसे निकालने हेतु बैंकिंग का चयन करें।)
3. मशीन के स्क्रीन पर भाषा चयन आता है। अंग्रेजी (English) और हिन्दी दोनों में किसी एक का चयन करें।
4. उसके बाद स्क्रीन पर पिन कोड (गुप्त अंक) डालने का निर्देश आता है। गुप्त अक (पिन कोड) डालने के बाद हस्तांतरण का निर्देश आता है।
5. आवश्यकतानुसार किसी एक का चयन करें- A. Balance (शेष राशि), B. Transfer (हस्तातरण), C. Cash Withdraw (रोकड़ निकासी), D. Mini Statement (संक्षिप्त विवरण),E. Post Cash Withdraw (त्वरित निकासी)।
6. नगद हस्तांतरण का चयन करें।
7. इसके बाद राशि अंकित करें जितना पैसे निकालने है। जैसे 1000/-,
2000/-, 5000/- इत्यादि।
8. इसके बाद स्क्रीन पर सही और गलत अंकित होगा सही का चयन करें।
9. इसके बाद स्क्रीन पर निकाली गई राशि की रसीद चाहिए तो हां चुने, नहीं तो नहीं।
10. पैसे निकलना शुरू होगा मशीन से एक आवाज़ सुनाई देगी, ‘पैसा लेना
11. अन्य हस्तातंरण “स्क्रीन” पर आयेगा तो ‘नहीं’ का चयन करना है तथा अन्त में रसीद लेकर कैन्सिल’ बटन दबाना है।
जिस एटीएम में कार्ड अन्दर जाता है। अन्य हस्तांतरण के समय “नहीं” चयन करने के बाद कार्ड वापस बाहर आ जाता है तथा अन्त में कैंसिल बटन दबा कर संचालन कार्य समाप्त करते है।
किसी ए. टी. एम. में संचालन का तरीका भिन्न-भिन्न है। सभी का तरीका एक जैसा नहीं होता है। थोड़ा अन्तर आ जाता है। किसी भी एटीएम में किसी भी बैंक के ए. टी. एम. कार्ड से पैसे निकाले जा सकते है।

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

ए. टी. एम. में जाने से पूर्वः-
1. पिन कोड को सुरक्षित रखें। पिन कोड को हाथ, कवर या किसी अन्य चीज पर न लिखें तथा अपरिचित लोगों के साथ साझा न करें।
2. रात के समय ए. टी. एम. इस्तेमाल करते समय अपने साथ अपने विश्वासी लोग को ले जायें।

ए. टी. एम. का चयन:-

1. हमेशा ध्यान रखें कि ए. टी. एम. खुले स्थान (पर्याप्त रोशनी) में स्थित हो।
2.अगर कोई चोर-उचक्का ए.टी.एम. के आसपास घूमता नजर आये तो दूसरे ए. टी. एम. का चयन करें।
3. अगर ए. टी. एम. देखने में (संदेहास्पद) हो या मशीन से कोई ध्वनि सुनाई दे या पैड पर कोई गड़बड़ी हो तो भी दूसरे ए. टी. एम. का चयन करें तथा संबंधित बैंक या गार्ड को सूचित करें।

ए. टी. एम. के अन्दर

1. सर्व प्रथम आप क्या कर रहे है। इसका ध्यान दें। अन्दर में मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें इससे आपका ध्यान भंग होगा।
2. ए. टी. एम. से पैसे निकालने हेतु किसी अजनबी की सहायता न लें।
अगर आप समस्या में हो।
3. अगर ए. टी. एम. आपका कार्ड वापस कर दें, कुछ अलर्ट या नोट आ
जाय तो जल्द से जल्द बैंक को सूचित करें।
4. पिन कोड इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें कि आपका पिन कोर्ड कोई देख न रहा हो। की-पैड को ढककर रखें।
5.अगर आपका हस्तांतरण पूरा हो गया हो तो रसीद, कोड और पैसे प्राप्त करने के बाद पैसे को सुरक्षित स्थान में गिनें।
6.अगर कोई व्यक्ति आपके पैसे मांगे या छीने तो उसके साथ झगड़ा नहीं करें, तुरन्त पुलिस को सूचित करें।


ए. टी. एम. कार्ड सुरक्षा

1. ए. टी. एम. कार्ड आपके बैंक खाता को संचालित करने की सुविधा
उपलब्ध कराता है। इसलिए सुरक्षित तरीके से रखें तथा इस्तेमाल करें।
2. कार्ड में अपना हस्ताक्षर करें।
3. अपना पिन कोड चयन करते समय जन्मतिथि, मोबाइल नम्बर टेलीफोन नम्बर, मकान नम्बर या सोसाइटी नम्बर इत्यादि का चयन न करें।
4. कभी किसी को अपना पिन कोड न बतायें, चाहे वह बैंक का कर्मचारी ही क्यों न हो।
5. अगर आप अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे है तो सेवा में रुकावट से बचने के लिए “रिप्रेजन्टेटिव फ्लैग” की जानकारी बैंक से ले लें।
6. अगरकार्ड चोरी हो जाय या खो जाये तो बकका अथवा बैंक के ग्राहक सेवा केन्द्र” को अविलम्ब सूचित करें।

समस्याएं:-

ग्राहकों की सुविधा के लिए बैंको से रुपये निकासी सरल बनाने हेतु ए. टी. एम. मशीनों को लागू किया गया है। लेकिन इसके प्रचालन तंत्र में कई समस्याएं आती है। जैसे
1. मशीन का हेंग हो जाना।
2. बिना नोट निकले ही निकाले गए रुपयों की खाली रसीद बाहर दिखना तथा मोबाइल में हस्तांतरण का संदेश आना।
3. मशीन से कभी-कभी नकली नोट का निकलना।
4. “ग्राहक सेवा केन्द्र” की लाइन मुश्किल से मिलना।
5. ए. टी. एम. के अन्दर लगे अलार्म, स्विच का सही से काम न करना।
6. गलत भुगतान की प्रविष्टियों को ठीक करने की व्यवस्था भी कारगर नहीं है।

इलेक्ट्रोनिक मेल (ई-मेल)

इलेक्ट्रोनिक मेल साधारणतः email या e-mail के रूप में 1993 से जाना जाता है। यह डिजिटल संदेश को एक-दूसरे को आदान प्रदान करने का तरीका है। यह इन्टरनेट से संचालित होता है। इसमें संदेश को भेजना स्वीकार करना अथवा सुरक्षित किया जाता है। चाहे दूसरा ऑन लाइन हो या ना हो संदेश दूसरे तक पहुंच जाता है। बहुत सारे साफ्टवेयर है जहाँ से हम ई. मेल बना सकते है जैसे माइक्रोसॉफ्ट, आउटलुक जी मेल, हॉट मेल, रेडीफ मेल, याहू मल, आउटलूक इत्यादि।

ई-मेल आइडी बनाने का तरीका

1. वेब ब्राउसर खोलें।
2. डोमेन खोलें जिस पर आई.डी. बनाना चाहते हैं
Example- www.google.com/gmail/about#
3. क्रियेट एन एकाउन्ट को क्लिक करें।
4. विवरण भरें।
5. नेक्सट (अगला) बटन क्लिक करें।
6. अपना फोन नम्बर डालें पुष्टिकरण करें।
7. फोन नम्बर डालने के बाद दो विकल्प आयेगें एस.एम.एस. और वॉयस कॉल दोनों में से कोई एक चुनें।
8. इससे आपको एक कोड प्राप्त होगा इस कोड को जहां आप मेल आई.डी. बना रहे है। उस जगह एक बॉक्स में डाले।
9. कंटीन्यू बटन को क्लिक करें।
10. इस तरह लगभग आपकी आई.डी. बन गई। अगर आप अपना तस्वीर डालना चाहते है। तो
11. एडिट प्रोफाइल फोटो बटन को क्लिक करें।
12. इसके बाद नेक्सट सेव बटन क्लिक करें।
13. क्लिक कंटीन्यू बटन
इस तरह आपकी ई-मेल आइ-डी तैयार, अब आप भी इलेक्ट्रॉनिक दुनिया का आनन्द उठा सकते हैं।

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