स्काउटिंग में ध्वज की जानकारी

स्काउटिंग में ध्वज की जानकारी

राष्ट्रीय ध्वज की बनावट व महत्व

इस पोस्ट में राष्ट्रीय ध्वज महत्व और ध्वज शिष्टाचार जाने।

राष्ट्रीय ध्वज

राष्ट्रीय ध्वजराष्ट्रीय ध्वज किसी भी राष्ट्र के लिये गौरव का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) तीन बराबर लम्बाई की पट्टियों से मिलकर बना है। जिसमें सबसे ऊपर की पट्टी का केसरिया रंग साहस व बलिदान का प्रतीक है, बीच का सफेद रंग पवित्रता व शांति का प्रतीक है, सबसे नीचेवाला हरा रंग हमारे राष्ट्र की संपन्नता व खुशहाली का प्रतीक है।सफेद पट्टी के बीच में, पट्टी जितनी ही चौड़ाई का गहरे नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है। इस चक्र में 24 अरे होते हैं। यह चक्र देश की निरंतर प्रगति को दर्शाता है। भारत की संविधान निर्मात्री सभा ने इसे 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया था। 
ध्वज की लं. व चौ.का अनुपात 3:2 होता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहते हैं, राष्ट्रीय ध्वज देश की स्वतंत्रता का प्रतीक होता है। हमारे राष्ट्रीय ध्वज में, तीन रंग विद्यमान हैं, इसके वजह से इसका नाम तिरंगा रखा गया है। पहले के राष्ट्रध्वज संहिता के अनुसार केवल सरकार तथा उनके संगठन के माध्यम से ही राष्ट्र पर्व के अवसर पर ध्वज फहराने का प्रावधान था। परन्तु उद्योगपति जिन्दल के न्यायपालिका में अर्जी देने के बाद ध्वज संहिता में संशोधन लाया गया। कुछ निर्देशों के साथ निजी क्षेत्र, स्कूल, कार्यालयों आदि में ध्वज लहराने की अनुमति दी गई।

राष्ट्रीय ध्वज में रंगों के मायने तथा महत्व

राष्ट्र ध्वज में तीन रंग सुशोभित हैं, इसकी अभिकल्पना स्वतंत्रता प्राप्ति के कुछ ही समय पूर्व पिंगली वैंकैया ने किया था। इसमें केसरिया, सफेद तथा हरे रंग का उपयोग किया गया है। इनके दार्शनिक तथा अध्यात्मिक दोनों ही मायने हैं।

  • केसरिया– भगवाँ मतलब वैराग्य, केसरिया रंग बलिदान तथा त्याग का प्रतीक है, साथ ही अध्यात्मिक दृष्टी से यह हिन्दु, बौद्ध तथा जैन जैसे अन्य धर्मों के लिए अस्था का प्रतीक है।
  • सफेद– शान्ति का प्रतीक है तथा दर्शन शास्त्र के अनुसार सफेद रंग स्वच्छता तथा ईमानदारी का प्रतीक है।
  • हरा– खुशहाली और प्रगति का प्रतीक है तथा हरा रंग बिमारीयों को दूर रखता है आखों को सुकून देता है व बेरेलियम तांबा और निकील जैसे कई तत्व इसमें पाए जाते हैं।

राष्ट्रध्वज की बनावट

इसकी प्रत्येक पट्टियां क्षैतिज आकार की हैं। सफेद पट्टी पर गहरे नीले रंग का अशोक चक्र अपनी 24 आरों के साथ तिरंगा की शोभा बढ़ा रहा है। जिसमें 12 आरे मनुष्य के अविद्या से दुःख तक तथा अन्य 12 अविद्या से निर्वाण (जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्ति) का प्रतीक है। ध्वज की लम्बाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 है। राष्ट्रीय झंडा निर्दिष्टीकरण के अनुसार राष्ट्रध्वज हस्त निर्मित खादी कपड़े से ही बनाया जाना चाहिए।

indian-flag tiranga
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भारत का राष्ट्रध्वज देश का शान, गौरव तथा अभिमान होता है। इसकी अभिकल्पना महान पुरूषों द्वारा बहुत सोच समझ कर की गई है। जिसमें प्रत्येक रंग तथा चक्र देश की एकता, अखण्डता, विकास तथा खुशहाली को दर्शाता हैं।तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज है, जो तीन रंगों से बना है, इसलिए इसे ‘तिरंगा’ कहते हैं। तिरंगे में सबसे ऊपर गहरा केसरिया, बीच में सफ़ेद और सबसे नीचे गहरा हरा रंग बराबर अनुपात में है। ध्‍वज को साधारण भाषा में झंडा भी कहा जाता है। झंडे की चौड़ाई और लम्‍बाई का अनुपात 2:3 है। सफ़ेद पट्टी के केंद्र में गहरा नीले रंग का चक्र है, जिसका प्रारूप अशोक की राजधानी सारनाथ में स्थापित सिंह के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले चक्र की भांति है। चक्र की परिधि लगभग सफ़ेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर है। चक्र में 24 तीलियाँ हैं। राष्‍ट्रीय ध्‍वज 22 जुलाई, 1947 को भारत के संविधान द्वारा अपनाया गया था।

रंगों का महत्त्व

तिरंगे में रंगों का क्या महत्त्व है, यह इस प्रकार है-

‘केसरिया’ यानी ‘भगवा रंग’ वैराग्य का रंग है।

हमारे आज़ादी के दीवानों ने इस रंग को सबसे पहले अपने ध्वज में इसलिए सम्मिलित किया, जिससे आने वाले दिनों में देश के नेता अपना लाभ छोड़ कर देश के विकास में खुद को समर्पित कर दें।

जैसे भक्ति में साधु वैराग लेकर मोह-माया से हट भक्ति का मार्ग अपनाते हैं।

‘श्वेत रंग’ प्रकाश और शांति के प्रतीक के रूप में लिया गया है।

‘हरा रंग’ प्रकृति से संबंध और संपन्नता को दर्शाता है।

ध्वज के केंद्र में स्थित अशोक चक्र धर्म के 24 नियमों की याद दिलाता है।

झंडा ऊँचा रहे हमारा…विश्व विजयी तिरंगा प्यारा..

उपरोक्त गीत भारत का बच्चा-बच्चा बड़ी ही शान से गुनगुनाता है। इस ध्वज में ऐसी क्या बात है, जिसने आज़ादी के परवानों में एक नया जोश भर दिया था और जो आज भी हर भारतीय को अपने गरिमामय इतिहास की याद दिलाता है और विभिन्नता में एकता वाले इस देश को एक सूत्र में बाँधे हुए है। हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर लाल क़िले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज को बड़े ही आदर और सम्मान के साथ फहराया जाता है।

देश के प्रथम नागरिक से लेकर आम नागरिक तक इसे सलामी देता है। 21 तोपों की सलामी से सेना इसका सम्मान करती है। किसी भी देश का झंडा उस देश की पहचान होता है। तिरंगा हम भारतीयों की पहचान है। राष्ट्रीय झंडे ने पहली बार आज़ादी की घोषणा के कुछ ही दिन पहले 22 जुलाई, 1947 को पहली बार अपना वो रंग रूप पाया जो आज तक क़ायम है।

सबसे ऊपर केसरिया रंग फिर सफ़ेद और सबसे नीचे हरा। बीच में गहरे नीले रंग का चक्र बना है, जिसमें 24 चक्र हैं, जिसे हम ‘अशोक चक्र’ के नाम से जानते हैं।

राष्ट्र-ध्वज फहराने के नियम

  • केसरिया रंग ऊपर, हरा नीचे हो। झण्डा लपेटकर फहराना चाहिए।
  • ध्वज को सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराना चाहिए। ध्वज को राष्ट्रीय पर्वो व उत्सवों में फहराना चाहिए।
  • हाईकोर्ट (न्यायालयों), सचिवालयों, कमिश्नरी, कलक्टरी, जेल, केन्द्रीय व प्रान्तीय मंत्रियों के आवास, राष्ट्रपति भवन, संसद, राजदूतों व राज प्रमुखों के निवास, सीमाओं, सैनिक केन्द्रों, सुरक्षा बलों द्वारा विभिन्न केन्द्रों पर प्रतिदिन फहराया जाता है।
  • राष्ट्रीय-ध्वज सब झण्डों से पहले फहराया जायेगा और सबके अन्त में उतारा जायेगा।
  • दो या उससे अधिक राष्ट्रों के झण्डे समान ऊँचाई पर फहराये जाते है।
  • वक्ता के मंच पर ध्वज मंच के दाहिने तथा उससे ऊंचा हो।
  • ध्वज फट जाने पर उसे सम्मान पूर्वक एकान्त में किसी प्रकार से नष्ट कर देना चाहिए।
  • “शोक प्रकट करने के लिये राष्ट्र-ध्वज को पहले पूरा फहराकर तब झण्डे की चौड़ाई के बराबर नीचे लाकर फहराना चाहिए। उतारते समय ऊपर तक ले जाकर धीरे-धीरे उतारना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर के नेता की मृत्यु हो जाने पर उनके सम्मान में उनकी शव-शैया को राष्ट्रीय ध्वज से ढक सकते हैं। किन्तु अग्नि प्रज्ज्वलन से पूर्व सम्मान पूर्वक हटा देना चाहिए।

निषेध

  • राष्ट्रीय ध्वज केवल राष्ट्रपति के सम्मान में झुकाया जाता है, अन्य किसी के आगे नहीं
  • राष्ट्रीय झण्डे के दाहिने ओर कोई झण्डा नहीं फहराया जाना चाहिए।
  • राष्ट्रीय झण्डे के दाहिने किसी व्यक्ति को खड़ा नहीं होना चाहिए।
  • राष्ट्रीय झण्डे को जमीन से नहीं छूने देना चाहिए।
  • राष्ट्रीय झण्डे में चक्र के अतिरिक्त अन्य चिह्न नहीं बनाने चाहिए।
  • राष्ट्रीय झण्डे को किसी चीज के बांधने या बिछाने के काम में नहीं लाना चाहिए।
  • राष्ट्रीय झण्डे को भूमि के समानान्तर नहीं झुकाना चाहिए।

भारत स्काउट्स व गाइड्स ध्वज-

भारत स्काउट्स एव गाइड्स ध्वज 15 अगस्त, 1951 से भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ध्वज देश का एकमात्र ध्वज है। यह गहरे आसमानी रंग की पृष्ठभूमि का होता हैं नीला आसमान जिस प्रकार सम्पूर्ण विश्व को ढके हुए है, उसी प्रकार ध्वज का नीला रंग संगठन की विश्व-व्यापकता का प्रतीक है। बीच में स्काउट/गाइड बैज पीले रंग का बना होता है, जिसकी तीन पंखुड़ियाँ स्काउट/गाइड प्रतिज्ञा की तीन प्रतिबद्धताओं को प्रतिबिंबित करती हैं।

बैज के मध्य में बना पीले रंग का अशोक-चक्र धर्म के अनुसार आचरण करने तथा प्रगति-पथ पर आगे बढ़ते रहने का द्योतक है। गाइड-त्रिदल सम्मिलित ध्वज तथा आकाश में सूर्य के समान चमकने का प्रतीक है। (Guide Trefoil) चक्र में चौबीस आरे बने होते हैं जो चौबीस घण्टों को प्रदर्शित करते हैं। ये चौबीस आरे हमें चौबीसों घण्टे सतर्क और सावधान रहने का संदेश देते हैं। स्काउट चिन्ह की नीचे की तीन पंखुड़ियां जिन्हें एक सूत्र में बांधा गया है – अनुशासन और विश्व बन्धुत्व का प्रतीक है।

ध्वज की नाप 3:2 के अनुपात में होती है,अर्थात् लम्बाई 3 हो तो चौड़ाई 2 होगी। संस्था के ध्वज में बैज की नाप 45 x 30 से. मी. होगी। स्काउट ध्वज फहराने के नियम लगभग राष्ट्र-ध्वज की भाँति होते हैं। स्काउट गाइड ध्वज फहराते समय सैल्यूट दिया जाता है।

भारत स्काउट व गाइड ध्वज (बनावट व महत्व)

  • यह गहरे नीले रंग का होता है और इसके बीच में स्काउट बैज पीले रंग की पृष्ठभूमि पर नीले रंग से बना होता है।एसोसिएशन (संस्था) का झंडा 180 x120 से.मी. का होता है।उसमें बैज 45×30 से.मी. का होता है।
  • दलों का ध्वज 120×80 से.मी. का होता है और बैज 30×20 से.मी. का बना होता है।झण्डे का नीला रंग आसमान की तरह विश्व व्यापक भ्रातृत्व भाव प्रदर्शित करता है, जिस प्रकार नीले आसमान के नीचे संसार के सभी प्राणी रहते हैं उसी तरह झण्डे के नीचे भारत स्काउट-गाइड उन्नति करें । 
  • बैज में त्रिदल की तीन पंखुड़ियां स्काउट-गाइड की प्रतिज्ञा के तीन भागों की याद दिलाती हैं एवं सदा उन्नति करने को प्रेरित करती रहती हैं। 
  • ध्वज की नाप 3:2 के अनुपात में होती है।

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ध्वज के प्रकार

1.संस्था का झण्डा (Association Flag)-180×120 से. मी.।

2. दल कम्पनी का झण्डा (Troop/Company Flag)- 120×80 से. मी.।

3. टोली ध्वज (Patrol Flag)-20x30x30 से. मी. नाप का जिसके सफेद कपड़े के मध्य में लाल रंग से टोली का चिन्ह बना होता है।

ध्वज फहराने के नियम

* विश्व स्काउट/गाइड ध्वज हमारे राष्ट्रीय ध्वज के बायें ओर तथा उससे नीचे होगा, पर भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ध्वज से ऊँचा व दायें ओर होगा।

* जब ध्वज ले जाया जा रहा हो तो दायें कन्धे के ऊपर तिरछा हो तथा दायें हाथ से पकड़ा व बन्द हो। जब मार्च पास्ट में ले जाया जा रहा हो तो ‘दाहिने देख’ पर फहरा दिया जायेगा और ‘सामने देख’ पर पुनः बन्द की स्थिति में लाया जायेगा। लाठी पर सुन्दर ढंग से लपेटकर सुनहरी डोरी से बांध कर भी ले जाया जा सकता है।

मुख्य विशेष समारोह जम्बूरी आदि के समय

* भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ध्वज राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त के अतिरिक्त अन्य किसी के लिये नहीं झुकाया जा सकता।

विश्व स्काउट ध्वज (बनावट व महत्व)

  • यह ध्वज गहरे बैंगनी रंग का होता है और बीच में सफेद रंग का विश्व स्काउट बैंज बना होता है। बैज के चारों ओर सफेद रंग की रस्सी का गोल घेरा होता है।
  • इस गोल घेरे के नीचे की ओर रीफ नॉट लगी होती है। इस ध्वज की नाप 3 : 2 के अनुपात में होती है। यह बैंगनी रंग अंतर्राष्ट्रीय प्रेम, और सेवा का प्रतीक होता है। 
  • इसमें लगी हुई रीफ नॉट विश्व भ्रातृत्व का प्रतीक है और बैज के दो सितारे स्काउट नियम व प्रतिज्ञा के प्रतीक हैं।
  • इस ध्वज को 18वें विश्व सम्मेलन लिस्वन में सन् 1951 में स्वीकार किया गया। इसे अंतर्राष्रीय शिविरों, सम्मेलनों आदि में फहराया जाता है।
  • यदि इसे दलों में फहराना हो तो भारत स्काउट व गाइड झन्डे से ऊँचा और उसके दाहिनी ओर फहराना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के बाये तथा इससे नीचा होगा।

विश्व स्काउट-ध्वज को 18वें स्काउट सम्मेलन-1961 में लिस्बन में स्वीकार किया गया। ध्वज का आकार संस्था के ध्वज (Association Flag) की भांति 3:2 के अनुपात में होता है। ध्वज का कपड़ा जामुनी रंग (Purple) का होता है जिसके मध्य में 3:2 के अनुपात का विश्व स्काउट बैज बना होता है। विश्व ध्वज की लम्बाई व चौड़ाई 135×90 से. मी. है।

इसी प्रकार विश्व स्काउट बैज की साइज भी 45×30 से. मी. होती है। हमारे संस्थापक के अनुसार तीन पंखुड़ियाँ प्रतिज्ञा के तीन भागों को दर्शाती हैं। सुई सही दिशा का प्रेरक और दो तारे प्रतिज्ञा व नियम व ज्ञान तथा सच्चाई को दर्शाते हैं। रस्सी का गोला विश्व व्यापी संस्था को दर्शाता है।

विश्व ध्वजों को केवल विश्व स्तर के शिविर या सभाओं में ही फहराया जाता है।

विश्व गाइड ध्वज की बनावट व महत्व (World Guide Flag Design and Significance)

  • विश्व गर्ल गाइड एसोसिएशन और गर्ल स्काउट की विश्व समिति ने मई 1991 से इस नए विश्व गाइड ध्वज को अपनाया है।
  • इस ध्वज की नाप 3:2 के अनुपात में होती है। 
  • इसके गहरे चमकदार नीले रंग की पृष्ठभूमि पर झण्डे के सबसे ऊपर हाइस्ट के कोने पर सुनहरी रंग में विश्व त्रिदल है तथा फ्लाई के नीचे वाले अंतिम सिरे पर पीले रंग के कोणाकार (डायगनली) जुड़े हुए तीन वर्ग हैं।
  • ये भी प्रतिज्ञा के तीनभागों के प्रतीक हैं जिनके नीचे की ओर सफेद रंग में उल्टे एल ( L) की शक्ल में एक आकृति है जो शांति की प्रतीक है।
  • इस ध्वज का नीला रंग विश्व की गाइडों में एक दूसरे की बहिन (Sisterhood) का प्रतीक है तथा त्रिदल की तीन पंखुड़ियां प्रतिज्ञा के तीन भागों की याद दिलाती हैं। बैज की दो पंखुड़ियों में दो सितारे गाइड नियम तथा प्रतिज्ञा के प्रतीक हैं। 
  • बीच की पंखुड़ी में अंकित सुई कम्पास की सूई है जो गाइडों को सही मार्ग एवं दिशा की ओर अग्रसर होने के लियेप्रेरित करती है।
  • त्रिदल के नीचे अग्नि की एक लपट है जो हमारे मन में सभी के प्रति प्रेम की ज्वाला जलते रहने का प्रतीक है।
  •  त्रिदल के बाहर का घेरा हमारे विश्वव्यापी संगठन को प्रदर्शित करता है। नीचे घेरा खुला होना इस बात का प्रतीक है कि कोई भी मतावलम्बी गाइड परिवार में प्रवेश कर सके।

विश्व-गाइड-ध्वज का नार्वे की मुख्य गाइड मिस फोक कैरी आस’ द्वारा प्रस्तावित डिजाइन 1930 के विश्व गाइड सम्मेलन, फाक्सलिज, इंग्लैण्ड में स्वीकार किया गया। 80वीं विश्व गाइड सम्मेलन मार्च 1991 में नये विश्व ध्वज व त्रिदल बैज को स्वीकार किया गया। ध्वज का आकार 3:2 के अनुपात में होता है।   नीले रंग की पृष्ठभूमि में सुनहरा ध्वज के उपरी भाग में इस तरह बनाया गया है कि मानो नीले आसमान में सूर्य चमक रहा हों। इसके बैज की पंखुड़ियों में बने दोनों सितारे नियम और प्रतिज्ञा के प्रतीक हैं, जो हमारे जीवन में पथ-प्रदर्शन करते हैं। कम्पास की सुई की तरह की रेखा हमें सही दिशा पर चलने का बोध कराती है।  

त्रिदल के नीचे की अग्नि ज्वाला मानव प्रेम की परिचायक है जो कि हमारे मन में विश्व भाईचारा को दर्शाती है। ध्वज के दाँयी ओर सफेद के साथ गोल्डन चौकोर आकृतियां प्रतिज्ञा के तीन भागों को दर्शाता है।

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