बी. पी. के जीवन तथा स्काउटिंग गाइडिंग की प्रमुख घटनाएं

इस पोस्ट में आपको ”  स्काउटिंग गाइडिंग की प्रमुख घटनाएं (Major events of Scouting Guiding)” के बारे में बताया गया है।  जिसे हमने स्काउट-गाइड  के विविध पुस्तकों को अध्ययन करके लिखा है।  जो आपको पसंद आएगी. अतः हम चाहते हैं कि इस पोस्ट को पूरा पढें। 

स्काउट का शाब्दिक अर्थ

‘स्काउट’ का शाब्दिक अर्थ है- गुप्तचर, भेदिया, जासूस। फौज में जो चुस्त, चालाक, साहसी हो, रास्ता बनाने, नदी-नालों पर पुल बनाने, संकेतों द्वारा संवाद भेजने, घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करने तथा शत्रु की गतिविधियों का पता अपने अधिकारियों को देने का काम करते हैं उन्हें ‘स्काउट’ कहा जाता है।

टीचर्स कालेज, कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयार्क के प्रोफेसर जेम्स ई. रसल ने लिखा है-

“The Programme of boy scouts is the man’s job cut down to boy’s size. It appeals to the boy not merely because he is a boy, but because he is a man in making.

टीचर्स कालेज, कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयार्क के प्रोफेसर जेम्स ई. रसल

लार्ड बेडन पावेल ने फौजी स्काउट को बालोपयोगी स्वरूप प्रदान कर उनका चरित्र – निर्माण और व्यक्तित्व का विकास करने वाली संस्था बनाया, ताकि वे एक सुयोग्य नागरिक बन सकें। इसलिये बी. पी. को स्काउटिंग का जनक कहा गया है। उनके जीवन का अध्ययन स्काउट आन्दोलन की पृष्ठभूमि है। भारत और अफ्रीका उनकी कर्मस्थली थे। अतः स्काउटिंग में यहां के अनुभवों का समावेश होना स्वाभाविक है। उन्होंने स्काउट-भावना को जिस अर्थ में प्रतिबिंबित किया है, उसकी झलक प्राचीन भारतीय जनमानस में सर्वत्र व्याप्त थी। वर्तमान स्काउट/गाइड शिविर प्राचीन भारतीय शिक्षार्थियों का ही एक रूप था जो जंगलों में प्रकृति के सानिध्य में अवस्थित गुरु-आश्रमों में रहकर प्राकृतिक व स्वयं-सेवी जीवन-यापन कर शिक्षा ग्रहण करते थे। हमारे ऋषि मनीषी-तपस्वी जीवन पर्यन्त वनोपसेवन करते रहे। प्रकृति की सुरम्य गोद में सादगी का जीवन यापन कर चिन्तन, मनन, अध्ययन व साहित्य- रचना कर आत्मोन्नति हेतु तल्लीन रहे। वेद, पुराण, उपनिषद, ऋचाएं, महाकाव्य आदि की रचना इन्हीं शान्त, सुरम्य-नैसर्गिक सुषमा स्थलों पर हुई।

बी. पी. ने भारतीय गाँवों की चौपालों में अलाव के चारों ओर बैठे लोगों को किसी वृद्ध व्यक्ति को किस्से, कहानी, जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव सुनाते देखकर स्काउटिंग में कैम्प फायर’ का विचार ग्रहण किया। दक्षिण अफ्रीका और भारत के अनुभवों को एड्स टू स्काउटिंग’ नामक पुस्तक का स्वरूप दिया।

बी. पी. का जन्म

बी. पी. का जन्म 22 फरवरी, 1857 को स्टेनहॉल स्ट्रीट, लैंकेस्टर गेट लन्दन जिसे अब स्टेनपोल टेरेस लन्दन प.2 कहा जाता है, में रेवरेन्ड प्राध्यापक हर्बर्ट जार्ज बेडन पॉवेल के घर हुआ। वे आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में रेखागणित के प्राध्यापक थे जो आस्तिक, सादगी प्रिय तथा प्रकृति प्रेमी व्यक्ति थे। उनकी माता हेनरिटा ग्रेस स्मिथ ब्रिटिश एडमिरल की पुत्री थी जो स्नेहमयी कर्मठ, विदुषी महिला थी। बी. पी. की शिक्षा चार्टर हाउस स्कूल (Charter House School) में हुई। चार्टर हाउस में वे 1870 में छात्रवृत्ति लेकर प्रविष्ट हुए। जहां उन्हें ‘बेदिंग टावल’ के नाम से पुकारा जाता था, ये इस स्कूल में एक प्रसिद्ध फुटबॉल ‘गोलकीपर रहे। वे एक अच्छे नायक, नाटककार तथा कलाकार थे। 1876 में सेना अधिकारियों की भर्ती प्रतियोगिता में 700 अभ्यर्थियों में से कैवलरी में दूसरे और इनफैट्री में चौथे स्थान पर उत्तीर्ण हुए। अतः उन्हें प्रशिक्षण से मुक्त कर 13वीं हुसार्स रेजीमेन्ट, लखनऊ (भारत) में सब लेफ्टीनेन्ट पद पर नियुक्ति मिली। सन् 1883 में 26 वर्ष की अवस्था में वे कैप्टन हो गये। घुड़सवारी, सुअर का शिकार करना, स्काउटिंग तथा थियेटरों में भाग लेना उनके प्रमुख शौक थे।

बी. पी. को स्काउटिंग की प्रेरणा

बी. पी. को स्काउटिंग की प्रेरणा 1899-1900 में दक्षिण अफ्रीका की एक घटना से प्राप्त हुई। दक्षिण अफ्रीका में मेफकिंग (Mafeking) सामरिक महत्व का एक महत्वपूर्ण कस्बा था जहां 1500 गोरे और 8000 स्थानीय लोग रहते थे, हॉलैन्ड निवासी डच लोग जिन्हें यहां बोअर (Boers) के नाम से पुकारा जाता था, इस महत्वपूर्ण कस्बे को अपने अधीन लेना चाहते थे। “Who holds Mafeking, hold the regins of South Africa.” की कहावत वहां प्रचलित थी। बोअरों की 9000 सेना ने मेफकिंग को घेर लिया। बी. पी. के पास अंग्रेजी सेना में कुल मिलाकर 1000 सैनिक थे जिनके पास मात्र 8 बन्दूकें और थोड़ा-सा डाइनामाइट था। अपनी युक्ति से बी. पी. ने 217 दिन तक बोअरों को कस्बे में घुसने नहीं दिया। 17 मई, 1900 को इंग्लैण्ड से सैनिक सहायता प्राप्त होने के पश्चात बी. पी. ने बोअरों पर विजय प्राप्त की। इस विजय का पूर्ण श्रेय बी. पी. को जाता है।

इस विजय की एक प्रमुख घटना यह रही थी कि बी. पी. के स्टाफ ऑफिसर लाई एडवर्ड सिसिल ने मेफकिंग के 9 वर्ष से अधिक उम्र के लड़कों को इकट्ठा कर एक ‘कैडेट कॉस’ (Cadet Corps) या बाल-सेना तैयार की जिन्हें प्रशिक्षित कर और वर्दी पहनाकर संदेश वाहक, अर्दली, प्राथमिक चिकित्सा आदि कार्यों में लगा दिया तथा उनके स्थान पर लगे सनिकों को सीमा पर लड़ने के लिये मुक्त कर दिया। ‘गुड ईयर’ (Good Year) नामक सार्जेन्ट मेजर के नेतृत्व में इन लड़कों का कार्य अद्वितीय रहा। इनका साहस, चुस्ती, फुर्ती देखते ही बनते थे। लार्ड सिसिल के इस प्रयोग ने बी. पी. को प्रभावित किया। इस घटना से प्रेरित होकर उन्होंने “एड्स टू स्काउटिंग” (Aids to Scouting) नामक पुस्तक लिखी जो शीघ्र ही इंग्लैण्ड के विद्यालयों में पढ़ाई जाने लगी। इस पुस्तक से प्रभावित होकर मि. स्मिथ ने बी. पी. से लड़कों के लिये स्काउटिंग की एक योजना बनाने का आग्रह किया। परिणाम स्वरूप 1907 में इंग्लिश चैनल (ब्रिटेन की खाड़ी) में पूल हार्बर के निकट ब्राउनसी द्वीप में 29 जुलाई से 9 अगस्त तक समाज के विभिन्न वर्गो, विद्यालयों के 20 लड़कों का प्रथम स्काउट शिविर स्वयं बी. पी. ने आयोजित किया। इस प्रयोगात्मक शिविर के अनुभवों को उन्होंने ‘स्काउटिंग फॉर बॉयज’ (Scouting for Boys) नामक अपनी प्रसिद्ध पुस्तक में लिपिबद्ध कर दिया। इस पुस्तक के 26 कथानक (Camp Fire Yarns) बी. पी. द्वारा शिविर तथा कैम्पफायर में कहीं गई बातें तथा कहानियां हैं जिन्हें छ: पाक्षिक संस्करणों में जनवरी, 1908 से अप्रैल, 1908 तक प्रकाशित किया गया।

बी. पी. के जीवन तथा स्काउटिंग गाइडिंग की प्रमुख घटनाएं

बी. पी. के जीवन तथा स्काउटिंग गाइडिंग की प्रमुख घटनाएं तथा प्रमुख तिथियाँ निम्नाकिंत थी :-

1908- स्काउटिंग फॉर बॉयज नामक पुस्तक का प्रकाशन हुआ।
1909- क्रिस्टल पैलेस लन्दन की स्काउट रैली में 11000 स्काउट्स ने भाग लिया, वुल्फ पैट्रोल की कुछ लड़कियां भी स्काउट हैट व स्कार्फ पहनकर इस रैली में आ धमकी।
1910- बी. पी. की बहन मिस एग्नेस बेडन पावेल की सहायता से बी. पी. ने गर्ल गाइडिंग प्रारम्भ की।
1911- विन्डसर पैलेस में दूसरी स्काउट रैली में 30,000 स्काउट्स ने जार्ज पंचम को सलामी दी।
1912-बी. पी. ने मिस ओलेव सेन्ट क्लेयर सोम्स से शादी की।
1911- प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक स्काउट्स ने सहायता कार्य किया।

5 अगस्त, 1914 से 7 मार्च, 1920 तक कुल 23,000 स्काउट्स ने चिकित्सालयों एवं तट-रक्षा में सहायता की।
1916- बुल्फ कब संस्था खोली तथा वुल्फ कब हैण्डबुक लिखी।
1919- ‘एड्स टू स्काउट मास्टरशिप’ पुस्तक लिखी। गिलवेल पार्क की भूमि प्राप्त की। स्काउटर्स उच्च प्रशिक्षण केन्द्र बना। रोवरिंग प्रारम्भ हुई।
1920-ऑलम्पिया, लन्दन में पहली विश्व स्काउट जम्बूरी हुई जिसमें 34 देशों के 8000 स्काउट्स ने भाग लिया। भारत से 15 स्काउट तथा 8 कब सम्मिलित हुए। 6 अगस्त, 1920 को बी. पी. को विश्व चीफ स्काउट घोषित किया गया।
1921-बी. पी. का भारत आगमन हुआ।
1922- “रोवरिंग टू सक्सेस” नामक पुस्तक का प्रकाशन हुआ।
1924- दूसरी विश्व जम्बूरी डेनमार्क में कोपनहेगन के निकट अरमेलुन्डेन (Ermelunden) में सम्पन्न हुई जिसमें 33 देशों के 4549 स्काउट्स ने भाग लिया।
1929- तीसरी विश्व जम्बूरी ऐरोपार्क, बिर्केनहैड, इंग्लैंड में हुई। 69 देशों के 50,000 स्काउट्स ने भाग लिया।
1930-लेडी बी. पी. विश्व चीफ गाइड बनी।
1933- चौथी विश्व जम्बूरी हंगरी के गोडोलो में हुई जिसमें 54 देशों के लगभग 25,000 स्काउट्स सम्मिलित हुए।
1997- बी. पी. तथा लेडी बी. पी. का पुनः भारत आगमन हुआ। दिल्ली में अखिल भारतीय जम्बूरी आयोजित हुई। हॉलैण्ड में पाँचवी विश्व जम्बूरी हुई जिसमें 34 देशों के 28,750 स्काउट्स ने भाग लिया।
1941-8 जनवरी, 1941 को केन्या में लम्बी बीमारी के बाद 83 वर्ष 10 माह 17 दिन का शानदार जीवन जी कर बी. पी. स्वर्गवासी हुए। माउन्ट केन्या (अफ्रीका) में उनको दफनाया गया।

भारत में स्काउटिंग गाइडिंग

भारत आंग्ल शासनाधीन होने के कारण ज्यों-ज्यों इंग्लैण्ड में स्काउटिंग का प्रसार बढ़ता गया, यहां भी ऐंग्लो-इण्डियन बच्चों के लिये स्काउटिंग शुरू की गई। 1909 में कै. टी. एच. बेकर ने बॉय स्काउट एसोसिएशन गठित कर बंगलौर में पहला स्काउट दल बनाया। 1910 में कै. टी. टोड, मेजर डब्लू, पी. पैकनहम, कर्नल जे. एस. विलसन, सर एल्फेड पिकफोर्ड आदि ने भी पुणे, जबलपुर, कलकता आदि में स्काउट दल खोले। 1913 में विवियन बोस ने मध्य भारत में स्काउटिंग प्रारम्भ की। 1915 में डॉ. (मिसेज) एनीबेसेन्ट तथा डॉ. अरुन्डेल ने मद्रास में इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना कर दल खोले । उधर 1918 में पं. मदनमोहन मालवीय के सुझाव, पर पं. श्री राम बाजपेयी ने पंडित हृदयनाथ कुंजरु के सहयोग से इलाहाबाद में बालचर सेवा समिति दल का श्री गणेश किया। बाद की मुख्य घटनाएं आगे प्रस्तुत की गई है।

1909 में क्रिस्टल पैलेस लन्दन की घटना से प्रभावित होकर बी. पी. ने 1910 में अपनी बहिन मिस एग्नेस बेडन पावेल की सहायता से गाइडिंग का श्री गणेश किया। 1911 में भारतीय संस्थाओं में भी गाइडिंग प्रारम्भ हो गई। 1912 में बी. पी. ने मिस ओलेव सेन्ट क्लेयर सोम्स से शादी की, तभी से लेडी बी. पी. ने भी गाइडिंग के प्रसार में अपनी अहम् भूमिका निभाई, 1930 में वह विश्व चीफ गाइड बनीं। 7 नवम्बर, 1950 में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स संगठन की नींव पड़ी। 15 अगस्त, 1951 को गाइड संगठन का पूर्णतया विलीनीकरण हो गया। तब से देश में एकमात्र “भारत स्काउट्स एवं गाइड्स” संगठन कार्यरत है। भारत में स्काउटिंग गाइडिंग की तिथि वार मुख्य मुख्य घटनाएं निम्न प्रकार रही:-

  • 1909 के. टी. एच. बेकर ने बंगलौर में बॉय स्काउट एसोसिएशन बनाया तथा पहला स्काउट दल खोला।
  • 1910- के. टी. टोड ने किरकी (पुणे), मेजर डब्लू. पी. पैकनहम वाल्स ने जबलपुर में दल खोले । कर्नल जे. एस. विल्सन तथा सर एल्फेड पिकफोर्ड ने कलकत्ता में स्काउटिंग आरम्भ की।
  • 1913-विवियन बोस (Vivian Bose) ने भारतीय बच्चों के लिये मध्य भारत के प्रदेशों में स्काउटिंग शुरू की।
  • 1915- डॉ. (मिसेज) ऐनी बेसेन्ट तथा डॉ. अरुन्डेल ने मद्रास में ‘इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन’ की स्थापना की। बंगाल में भी भारतीय लड़कों के लिये स्काउटिंग शुरू की गई।
  • 1916- “बॉय स्काउट ऑफ इण्डिया एसोसिएशन” का मद्रास में गर्वनर ने उद्घाटन किया।
  • 1918 -पं. मदन मोहन मालवीय के सुझाव पर श्री राम बाजपेयी ने पं. हृदयनाथ कुंजरु के सहयोग से इलाहाबाद में बालचर सेवा समिति का श्री गणेश किया।
  • 1919- 1 दिसम्बर, 1919 को “सेवा समिति स्काउट एसोसिएशन” की स्थापना इलाहाबाद में की गई जिसका संरक्षक उत्तर प्रदेश के गवर्नर को बनाया गया। अब सारे देश में स्काउटिंग का जाल बिछ चुका था।
  • 1921-बी. पी. युगल ने भारत का दौरा किया। वे जहां-जहां गये रैलियां की गई। इलाहाबाद, जबलपुर, लखनऊ, रांची, मद्रास में रैलियां हुई “दक्षिण भारतीय स्काउट संगठन” और “इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन” का एकीकरण हो गया किन्तु “सेवा समिति स्काउट एसोसिएशन” अलग बना रहा।
  • 1937- प्रथम अखिल भारतीय जम्बूरी दिल्ली में आयोजित की गई जिसमें बी. पी. युगल को आमंत्रित किया गया।
  • 1938- एकीकरण का पुनः प्रयास किया गया। बॉय स्काउट एसोसिएशन के अतिरिक्त शेष संगठन एक हो गये। इनका नया नाम ‘द हिन्दुस्तान स्काउट एसोसिएशन’ पड़ गया।
  • 1947-स्काउट और गाइड संगठन को एक करने का प्रयास हुआ।
  • 1949-9 मई को सरकारी भवन (Present Rashtrapati Bhawan) में मीटिंग में भारत स्काउट्स और गाइड्स ध्वज स्वीकृत किया गया।
  • 1950- बॉय स्काउट्स एसोसिएशन इण्डिया, द हिन्दुस्तान स्काउट्स एसोसिएशन तथा अन्य एसोसिएशन का नया नाम 7 नवम्बर, 1950 को “भारत स्काउट्स एवं गाइड्स’ रखा गया।
  • 1951- 15 अगस्त, 1951 को गर्ल गाइड्स एसोसिएशन का पूर्णतया विलीनीकरण हो गया। तब से भारत में मात्र एक ही अधिकृत संगठन ‘भारत स्काउट्स एवं गाइड्स’ कार्यरत है जिसका राष्ट्रीय मुख्यालय, लक्ष्मी मजुमदार भवन, 16, महात्मा गाँधी मार्ग, इन्द्रप्रस्थ एस्टेट, नई दिल्ली-110002 में स्थित है।

भारत में स्काउटिंग के प्रणेता

पं. मदन मोहन मालवीय-

  • पं. मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर 1861 को इलाहाबाद में पं. ब्रजनाथ जी के घर पर हुआ।
  • मालवीय जी एक कुशल राजनीतिज्ञ शिक्षाविद व स्वतंत्रता सेनानी थे। स्वतंत्रता आन्दोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
  • मालवीय जी 1909 से 1918 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।1912 में सैन्ट्रल लेजिस्लेटिव एसेम्बिली के सदस्य रहे।
  • इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की ।उपनिषद का मंत्र ‘सत्यमेव जयते’ मालवीय जी के प्रचार-प्रसार के कारण भारत का आदर्श वाक्य बना।
  • मालवीय जी के सम्मान में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया। मालवीय जी को भारत सरकार ने पदम् भूषण व भारत रत्न अवार्ड से सम्मानित किया।
  • 1918 म प . मदन मोहन मालवीय जी के सझाव पर ही पं. श्रीराम बाजपेयी व डा. हृदयनाथ कुंजरू ने, इनके सहयोग व संरक्षण में भारतीय बच्चों के लिए इलाहाबाद में सेवा समिति ब्वाय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की।
  • इनके सानिध्य में प्रत्येक कुम्भ मेले में सैकड़ों स्काउट्स सक्रिय सेवाएं प्रदान करते थे।
  • इनकी मृत्यु 12 नवम्बर 1946 को हुई।

डा. हृदयनाथ कुंजरू-

  • डॉ. हृदयनाथ कुंजरू का जन्म 1 अक्टूबर 1887 को इलाहाबाद में पं. अयोध्यानाथ कुंजरू
  • के घर में हुआ।
  • ये केन्द्रीय विधानसभा के सदस्य रहे,व बाद में राज्य सभा के सदस्य रहे । ये राज्यों की सीमा निर्धारण करने वाली समिति के भी सदस्य रहे।
  • 1918 में पं. मदन मोहन मालवीय जी के प्रयास से भारतीय बच्चों के लिए . श्रीराम बाजपेयी के साथ मिलकर सेवा समिति ब्वाय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की। ये सेवा समिति के आजीवन प्रेजिडेन्ट रहे। वर्ष 1952 से 1957 तक भारत स्काउट्स व गाइडस संस्था के प्रथम नेशनल कमिश्नर रहे।
  • इनकी स्मृति में 1987 में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया ।
  • इनकी मृत्यु 03 अप्रेल 1978 को हुई।

पं. श्री राम बाजपेयी-

  • पं. श्रीराम बाजपेयी का जन्म 11 अगस्त ।
  • 1880 को शाहजहांपुर (उ.प्र.) में श्री गयादीन बाजपेयी के घर हुआ। ये रेलवे में विभिन्न विभागों में सेवारत रहे।
  • आपदा प्रबंधन प्राथमिक सहायता व ड्रिल पर आपका एकाधिकार था।
  • एक बार वे बाजार से सामान खरीद कर लाए । सामान के कागज की पुड़िया में स्काउटिंग के बारे में पढ़ कर प्रेरित हुए और भारतीय बच्चों के लिए भारत में सर्वप्रथम 1913 में शाहजहांपुर में एक स्काउट दल खोला। . मदन मोहन मालवीय जी के निमन्त्रण पर ये 1918 में इलाहाबाद कुंभ मेले में 100 स्काउट कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। उनके सेवाकार्य पर सभी मुग्ध हो गए। 1918 में ही उन्होंने . मदन मोहन मालवीय जी के सुझाव प्रेरणा व सहयोग से डॉ.हृदयनाथ कुंजरू के साथ मिलकर भारतीय बच्चों के लिए सेवा समिति ब्वय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की।
  • बाजपेयी जी ने 1921 में इलाहाबाद रैली में बेडन पावल व लेडी बेडन पावल को आमन्त्रित किया उस रैली में झंडेवाली घटना से बी पी बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने माना कि भारतीय स्काउट्स भी अन्य देशों स्काउट्स से कम नहीं है। ये पहले भारतीय स्काउटर थे जिन्होंने गिलविल पार्क (इंग्लैंडमें स्काउट मास्टर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • इनकी मृत्यु 06 जनवरी 1955 को हुई ।

डा. (श्रीमती) एनीबीसेन्ट-

  • डॉ. (श्रीमती) एनीबीसेन्ट का जन्म 01 अक्टूबर 1847 को लन्दन में हुआ था।
  • इनके माता-पिता आयरिश थे।
  • मई 1889 में ये थियोसोफिकल की सदस्या बनी व सन् 1906 में इस सोसाइटी की अध्यक्ष बनी।
  • 16 नवम्बर 1893 को श्रीमती एनीबीसेन्ट भारत आई उन्होंने भारत को अपनी मातृभूमि माना।
  • उन्होंने श्रीमद् भगवद गीता का अंग्रेजी अनुवाद किया।
  • उन्होंने भारत की आजादी के आन्दोलन में भाग लिया और जेल भी गई। उन्होंने भारतीय संस्कृति की रक्षा व उत्थान के लिए, पुराणों को ज्ञान का अक्षय भंडार बताया तथा उनका महत्व भारतीयों को समझाया।
  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिएउन्होंने अपने 15 वर्षों से संचालित हिन्दु कॉलेज को . मदन मोहन मालवीय जी को समर्पित करके महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1915-16 में डा. ( मिसेज) ने डा. अरुणडेल के सहयोग से मद्रास में इन्डियन बॉयज स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की तथा स्काउट दल खोले।
  • उन्होंने भारत में बच्चों के लिए स्काउटिंग के प्रचार-प्रसार में बड़ा योगदान दिया।
  • इनकी मृत्यु 1933 में हुई।
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