स्काउटिंग में भलाई कार्य (Good Turn)

स्काउटिंग में भलाई कार्य (Good Turn)

प्राचीन काल में नाइट्स (Knights) सच्चे स्काउट होते थे। उनके नियम भी स्काउट नियम की भांति थे। वे अपने कर्तव्य पालन को प्राथमिकता देते थे जैसे झूठ बोलना, चोरी करना, दूसरों को सताना आदि से कोसों दूर रहते थे। अपने देश की मान-मर्यादा की रक्षा के लिए वे मर मिटने को सदैव तत्पर रहते थे जो साहसिक कार्यों की खोज में घूमते रहते थे। इनके नियम निम्नलिखित होते थे।

  • अपने सम्मान की पवित्रता बनाये रखना,
  • ईश्वर, राजा व देश के प्रति वफादार होना,
  • महिलाओं, बच्चों व असहाय व्यक्तियों के प्रति विनम्र होना,
  • प्रत्येक व्यक्ति की सहायता को तत्पर रहना,
  • जरूरतमंदों को भोजन व धन देना, जिसके लिये बचत करना,
  • अपनी रक्षा व देश की रक्षा के लिये शस्त्र चलाना सीखना,
  • अपने को स्वस्थ और बलिष्ठ बनाये रखना,
  • प्रतिदिन कम से कम एक भलाई का कार्य अवश्य करना,

बी. पी. ने उक्त नियमों के आधार पर ही स्काउट नियम निर्धारित किये।

स्काउट गाइड भी प्रतिदिन कम से कम एक भलाई का कार्य अवश्य बनाते हैं। सेवा-भाव की आदत छोटे-छोटे भलाई के कार्यों से ही सुदृढ़ हो सकती है। वे इन कार्यों का श्री गणेश अपने घर से करते हैं। घर में माता-पिता की सेवा, भाई-बहिनों की सहायता, बड़ों और अतिथियों का सम्मान, अपनी सब चीजों को यथास्थान रखना व सुव्यवस्थित करना, अपने सभी कार्य स्वयं करना, घर-पड़ोस की स्वच्छता में योगदान करना, रोगियों की परिचर्या करना, नवागुन्तकों को रास्ता बताना, प्रत्येक कार्य को समय पर करने की आदत डालना, अपने दैनिक कार्यों जैसे दांत साफ करना, स्नान, शौच, गृह-कार्य, अध्ययन को समय पर करना, समय पर सोना व उठना, संतुलित भोजन करना, दिन में न सोना, ज्ञान-वर्धन के लिये प्रतिदिन पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ना, सायंकाल कोई न कोई खेल खेलना, समुचित मनोरंजन, छोटे-भाई-बहिनों को पढ़ाना, धूम्रपान-नशापान से अपने को अछूता रखना आदि असंख्य कार्य है।

विद्यालय में वे अनेक अच्छे कार्य कर यह सिद्ध कर देते हैं कि वे अन्य छात्रों से किस तरह भिन्न है। सामान्य छात्र गुरुजनों की आज्ञा-पालन में बुरा मुंह करते हैं जबकि स्काउट गाइड मुस्कुराकर प्रसन्नता से कोई भी कार्य करने को तत्पर रहते हैं। विद्यालय के फर्नीचर, बिजली, पंखे, दीवारों की सुरक्षा हो या पंक्ति बनाकर चलना, कक्षाओं में पढ़ाई का वातावरण बनाने में योगदान, पुस्तकालय में शान्ति स्थापना में योगदान, प्रार्थना में पंक्तिबद्ध कक्षाओं को लाने में सहायता, वृक्ष तथा फूलों की सुरक्षा, गुरुजनों तथा सह पाठियों के साथ विनम्र व्यवहार आदि कार्य कर सुयश के भाजन तथा गुरुजनों के प्रिय बन जाते हैं। इनके अतिरिक्त नल के आस-पास स्वच्छता बनाये रखना, वृक्षारोपण, सौन्दयाकरण, खेलों की व्यवस्था में योगदान, विद्यालय के विभिन्न आयोजन में सहयोग व प्रतिभाग में भी यथाशक्ति योगदान करते हैं।

एक प्रवेश स्काउट/गाइड को भलाई के कार्यों की एक डायरी (दैनिन्दिनी) भरनी आवश्यक है। जिसमें किये गये छोटे-छोटे भलाई के कार्यों का विवरण अंकित किया जाता हो, इन भलाई के कार्यों का स्काउटर/गाइडर द्वारा सत्यापन किया जाता है। स्काउट/गाइड प्रतिदिन अपने स्कार्फ पर एक गाँठ बांध लेते है। जिसे ‘सेवा गाँठ’ कहा जाता है। सेवा कार्य पूर्ण हो जाने पर वे इस गाँठ को खोल देते है।

बचपन में सेवा करने की आदत जिसमें पड़ जाये वह व्यक्ति अपने जीवन-क्षेत्र में सेवा कार्यों में सदैव अग्रणी रहता है। इंग्लैण्ड के एक अज्ञात स्काउट द्वारा एक भलाई के कार्य के परिणाम स्वरूप अमेरिका में स्काउटिंग पहुंची थी। घटना इस प्रकार हुई कि लन्दन में घना कोहरा छाया हुआ था। हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। अमेरिकी महानुभाव विलियम डी. बॉयस किसी स्थान पर जाना चाहते थे किन्तु कोहरे के कारण वे असफल प्रयास कर रहे थे।

एक स्काउट उनकी परेशानी देख उनके पास आया और विनीत भाव से पूछा, महोदय, क्या मैं आपकी कुछ सहायता कर सकता हूँ? मि. बॉयस ने अपना मन्तव्य बताया। वह बालक उन्हें वांच्छित स्थान ले गया। प्रसन्न होकर मि. बॉयस ने अपने पर्स में से आधा पौण्ड बालक को देते हुए कहा, ‘लो तुम्हारा पुरस्कार है। इस पर बालक ने विनम्रता से कहा, महोदय मैं एक स्काउट हूँ। पुरस्कार कैसे ले सकता हूँ? इस पर मि. बॉयस चकित रह गये। उन्होंने अपना कार्य पूर्ण कर उसी बालक की सहायता ली। स्काउट कार्यालय जाकर आवश्यक साहित्य क्रय किया और अमेरिका में स्काउटिंग फैलाई।

भारतीय स्काउटिंग के प्रणेता पं. श्री राम बाजपेयी जी थे, उन्होंने सार्वजनिक सेवा कार्यों के लिये नवयुवकों को एकत्रित किया जो मेलों में खोये बच्चों को ढूंढने, भीड़ नियंत्रण, मन्दिरों में दर्शनार्थियों को पंक्तिबद्ध करने, चोर-गिरहकटों पर निगरानी रखने, डूबतों को बचाने, प्राथमिक सहायता, दुर्भिक्ष, अकाल, बाढ़ आदि में सहायता व बचाव करने, लावारिस व्यक्तियों का दाह-संस्कार आदि कार्य करते थे, इन कार्यों को वर्तमान समय में वरिष्ठ स्काउट व रोवर्स करते है।

सज्जन व्यक्तियों को दूसरों की भलाई करने में आत्मिक सुख मिलता है। भलाई के कार्यों से हमारी अन्तःस्त्रवी ग्रन्थियां प्रसन्न होकर अधिक स्त्राव करती है। जिसका स्वास्थ्य पर अनुकुल प्रभाव होता है। अतः सुखी जीवन के लिये भलाई के कार्य अमृत तुल्य हैं।

प्रतिदिन घर पर भलाई का कार्य करना

प्रतिदिन घर पर भलाई का कार्य करें और कम से कम एक माह तक डायरी तैयार करें
(Daily Good Turn)

कार्यक्षेत्रः-

प्रणेता बेडेन पॉवेल द्वारा बताए गए कार्यक्षेत्रः-


(1) चरित्र निर्माण- स्वावलंबन और आत्मविश्वास
(2) समाज सेवा- दूसरों की सेवा और नित्य एक भलाई का कार्य।
(3) स्वास्थ्य- आरोग्य के नियम
(4) हस्त कौशल- तरह- तरह के कौशलों का ज्ञान
(5) धार्मिकता- ईश्वर में विश्वास और अपने धार्मिक नियमों का पालन तथा दूसरों के धार्मिक विश्वासों का सम्मान।

नित्य भलाई का कार्य-

स्काउट/गाइड सदैव सेवा कार्य में लगे रहते हैं, फिर भी उन्हें नित्य एक भलाई का कार्य करना अनिवार्य होता है। इसके लिए स्कार्फ में एक गाँठ लगाई जाती है।

नित्य डायरी लिखना-

स्काउट/ गाइड के लिये दैनिक डायरी का नमूना

क्र.भलाई के कार्यों का विवरणतिथिस्काउटर/गाइडर के हस्ताक्षर
1.मैंने आज अपनी पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाई01-05-2021
2.मैंने आज घर की चीजों को सुव्यवस्थित किया02-05-2021
3.
4.
5.

स्काउट/गाइड को प्रतिदिन अपने कार्यों एवं दिनचर्या का रिकार्ड रखने के लिए डायरी तैयार करना चाहिए।
स्काउटिंग जीवन के हर पड़ाव पर जरुरी-
स्काउटिंग एक जीवन शैली है। बचपन से वृद्धावस्था तक स्काउटिंग हमारे जीवन में नवीन चेतना का संचार करती है। हर उम्र के व्यक्ति को स्काउटिंग जीवन शैली से जीना चाहिये।


प्रत्येक स्काउट और गाइड को परोपकार अर्थात् दूसरों की भलाई का कम से कम एक काम प्रतिदिन अवश्य करना चाहिए। दूसरों की सेवा करने से मन शुद्ध होता है और भावनाएं परिष्कृत होती हैं । परोपकार अथवा समाजसेवा संबंधी कार्यों की खोज में हमें कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है ।
सेवा कार्य अपने घर तथा परिवार की परिधि में ही प्रारंभ किया जा सकता है। घर-आंगन की सफाई में सहायता देना, सब वस्तुओं को सजाकर यथास्थान रखना, परिवार के किसी सदस्य के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा करना तथा दवा लाकर देना आदि ऐसे घरेलू काम हैं जिनसे वे अपने बड़ों के कार्यभार को हल्का कर सकते हैं। अच्छे कार्य का प्रारंभ सदैव अपने घर से ही करना चाहिए। घर के वृद्धों की सेवा से बढ़कर कोई दूसरी सेवा नहीं है ।
इसी प्रकार स्वयं के मोहल्ले, विद्यालय, गांव या नगर में ऐसे अनेक कार्य हैं जिनमें वे सहायता प्रदान कर सकते हैं।
उदाहरण के लिये फलों के छिलकों, बीड़ी -सिगरेट के जले हुए टुकड़ों, कटे-फटे कागज, कांटों, ईंट- पत्थर आदि को मार्ग से हटाना आदि उपयोगी समाजसेवा के कार्य हैं ।

समाजसेवा संबंधी ऐसे अन्य अनेक काम हो सकते हैं जिनमें वे यथोचित योगदान कर सकते हैं- जैसे स्काउट तथा गाइड भूले भटके हुए लोगों को रास्ता दिखाकर, उन्हें परिचितों तथा संबंधियों के पास पहुंचाकर उनकी सहायता कर सकते हैं । वे स्थानीय मेलों तथा बड़े समारोहों में व्यवस्था संबंधी कार्यों में भी योगदान कर सकते हैं। विद्यालय को साफ-सुथरा रखने तथा उसकी सजावट में उनकी भूमिका उपयोगी हो सकती है ।

इसी प्रकार डूबते लोगों को बचाना, अग्निकाण्ड में लोगों की सहायता करना, मरीजों की सेवा करना, गर्मी में प्यासों को पानी पिलाना, दुर्घटना-ग्रस्त लोगों को प्राथमिक सहायता देना, बाढ़-पीड़ितों तथा सूखाग्रस्त लोगों की सहायता करना, पशु-पक्षियों के साथ दया का व्यवहार करना, पक्षियों के लिए पानी के परिन्डों की व्यवस्था करना आदि ऐसे अनेक कार्य हैं जिनके द्वारा स्काउट-गाइड सेवा के व्रत का निर्वाह कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त समाज व राष्ट्रसेवा के अनेक कार्य जैसे पल्स पोलियो, जल संरक्षण, स्वच्छता प्रोत्साहन, साक्षरता, आयोडिन युक्त नमक का प्रयोग, पर्यावरण संरक्षण आदि के प्रचार-प्रसार में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

‘गुड टर्न नॉट’


याद रखने के लिये स्काउट-गाइड प्रतिदिन अपने स्कार्फ पर एक गांठ बांध लेते हैं जिसे ‘गुडटर्न नॉट’ कहा जाता है। सेवा कार्य पूर्ण होने पर इस गांठ को खोल देते हैं।
नोट :- स्काउट-गाइड के प्रवेश पाठ्यक्रम में व गाइड के प्रथम सोपान में कम से कम एक माह तक प्रतिदिन किये गये सेवा कार्य की डायरी तैयार करें। दैनिक जीवन में भी डायरी लेखन को अपने जीवन का हिस्सा बनायें।

स्काउट के तृतीय सोपान के दक्षता पदक

निम्नलिखित ग्रुप अ और ब से कोई दो दक्षता पदक चुनकर उत्तीर्ण करें। प्रत्येक ग्रुप से एक लेना अनिवार्य है।

ग्रुप (अ)ग्रुप (ब)
(1) सिविल डिफेंस (Civil Defence)(1) सिटिजन (Citizen)
(2)कम्युनिटी वर्कर (Community Worker)(2) बुक बाइंडर (Book Binder)
(3) ईकोलोजिस्ट Ecologist)(3) न्यूट्रिलिस्ट (Naturalist)
(4) ओर्समेन (केवल स्काउट) (Darsman)(4) पथ फाइंडर (Path Finder)
(5) पायनियर (Pioneer)(5) एड्स अवेयरनेस (Aids Awareness)
(6) बल्ड कंजर्वेष्ठन (World Conservation )(6) आरोग्य व्यक्ति महिला (Healthy Marwoman)
(7) सेफ्टी नॉलेज (Safety Knowlege)(7) ड्रग अवेयरनेस (Drug Awareness)
(8) सेल्फ डिफेंस (Self Defense)(8) बोटमेन (Boatman)
(स्काउट) मेजबान (Hostess) गाइड के लिए।
 (9) कम्प्यूटर जागृति (Computer Awareness)

बस स्टेशन पर प्याऊ की व्यवस्था

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स स्थानीय संस्था हल्द्वानी ने द्वितीय सोपान के स्काउट/गाइड के लिये ग्रीष्मावकाश में एक माह तक पेयजल पिलाने का शिविर निम्नलिखित सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित करना निश्चित किया।

(अ) बस स्टेशन, हल्द्वानी
(ब) रेलवे स्टेशन, लालकुआँ
(स) पटेल चौक, हल्द्वानी

विद्यालय की मान सभा ने बस स्टेशन हल्द्वानी को चुना। अतः टोली नायकों ने स्काउटर/गाइडर के साथ बस स्टेशन का निरीक्षण किया। स्टेशन इंचार्ज से परामर्श कर स्थान का चयन किया गया। पानी के घड़े, पाइप और टिन शेड की व्यवस्था स्टेशन अधिकारी द्वारा किया जाना तय हुआ।

प्रतिभागी स्काउट/गाइड की टोलियों की तिथियाँ निर्धारित की गई। पहली जून को स्टेशन अधिकारी द्वारा एक माह तक चलने वाले प्याऊ (पानी पिलाने की सेवा का विधिवत् उद्घाटन किया। इस अवसर पर स्थानीय संस्था के अधिकारी भी उपस्थिति थे।

टोलियों में दो की डयूटी प्याऊ में, दो को ट्रे में ग्लास रखकर चलते फिरते पानी पिलाने का कार्य दिया गया। टोली के शेष सदस्य चार घंटे के बाद बदल दिये गये। अगले दिन दूसरी टोलीको अवसर दिया गया। यह क्रम पूरे जून माह तक चलता रहा। स्काउट गाइड ने मनोयोग से एक माह तक अपना यह प्रोजेक्ट पूरा किया। 30 जून को स्थानीय विधायक ने शिविर का समापन किया और स्काउट/गाइड की निःस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। स्काउट/गाइड द्वारा की गयी इस सेवा की सर्वत्र प्रशंसा की गई।

स्काउट/गाइड का राष्ट्रीय एकता में योगदान

हमारा देश विविधताओं का एक मिसाल है। इन विविधताओं में एकता को मैदानी भूभाग प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्न प्रकार हैं:-

1. भौगोलिक संरचना –

पर्वत, पठार, मैदान तथा तटीय मैदान के मानव का भौगोलिक परिवेश भिन्न होने से उसके विचारों, कार्यों एवं विकास में भिन्नता आ जाती है। प्रकृति की गोद में पला व्यक्ति सादगी, ईमानदारी, परिश्रमी, सीधे स्वभाव का होता है। जीविकोपार्जन के लिए उसे कठोर परिश्रम करना पड़ता है जबकि कृषि, उद्योग, यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण उसका जीवन पर्वत की अपेक्षा सहज होता है। अतः दोनों के रहन-सहन, खान-पान और विचार-विकास में भिन्नता आ जाती है।

2. धार्मिक अन्ध विश्वास –

इस देश में विश्व के लगभग सभी प्रमुख धर्मों के अनुयायी निवास करते हैं। हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिक्ख, इस्लाम, ईसाई, पारसी आदि धर्मों के अनुयायी अपने धर्म को श्रेष्ठ और दूसरे धर्मों को हेय मानते हैं जिससे धार्मिक उन्माद बढ़ता है और साम्प्रदायिक एकता को ठेस लगती है।

3. भाषावाद –

असंख्य भाषाओं का यह देश है जहां अंग्रेजी, उर्दू, हिन्दी, डोगरी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, तमिल, मलयालम, कन्नड, तेलगू, उड़िया, बंगला, असमी आदि भाषायें बोली जाती हैं। उत्तर भारत में जहाँ हिन्दी और उससे मिलती जुलती भाषाओं का बाहुल्य है तो दक्षिण में तमिल का वर्चस्व है। इन सब भारतीय भाषाओं की जननी संस्कृत रही है। भाषा के आधार पर प्रादेशिक इकाईयां बनाई गई है जिससे राष्ट्रीय एकता को खतरा बना रहा है।

4. खान-पान व वेश –

पंजाब में सिक्ख पगड़ी पहन कर अपनी अलग पहचान बनायें हैं तो बंगाली धोती-कुर्ता, तमिल लुंगी पहन कर अपनी पहचान बनायें हैं। इसी प्रकार पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यक्ति का रोटी खाना प्रमुख भाजन है, तो बगाल, असम और दक्षिण भारत के लोगों का चावल। उत्तर प्रदेश में पूर्व में अरहर की दाल के खाने वाले प्रमुख हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग उडद कादाल का अतः खान-पान व वेश भी राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करते

5. राजनीति बनाम जातिवाद –

इस देश में असंख्य जातियाँ हैं। हिन्दुओं में ही सवर्ण, असवर्ण, जनजातियाँ है, तो मुसलमानों में सिया-सुन्नी का झगड़ा चलता रहता है। इसका लाभ उठाते हैं राजनीतिक दल। जाति के आधार पर प्रत्याशी खड़े किये जाते हैं। अपनी जाति के व्यक्ति को चुनने के लिये लोगों में जातिगत उन्माद उभर आता है, जिससे राष्ट्रीय एकता को चोट पहुँचती हैं।

6. अन्य कारक जैसे क्षेत्रीयता, अज्ञानता, अशिक्षा, असंतुलित विकास आदि भी राष्ट्रीय एकता को झकझोरते रहते हैं।

राष्ट्रीय एकता हेतु सहायक तत्व

1. धार्मिक सहिष्णुता –

प्रत्येक धर्मावलम्बी को अपने धर्म का अनुसरण करते हुए अन्य धर्मों का समादर करना चाहिए। दूसरे धर्मों के ग्रन्थों को पढ़ना चाहिए। इससे उनमें समदृष्टि व विवेक जागृत होगा। क्योंकि सभी धर्मों का उद्देश्य है, मानव जीवन को मर्यादित कर सुखी बनाना।

2. एक राष्ट्र-भाषा –

देश में बहुसंख्य लोग हिन्दी भाषी होने से स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् हिन्दी को राष्ट्र-भाषा स्वीकारा गया। इस भाषा का उदय संस्कृत से ही हुआ है। विचारों के आदान-प्रदान के लिये एक भाषा को होना नितान्त आवश्यक है। अतः क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ हिन्दी को देश को जोड़ने वाली भाषा के रूप में सीखा जाना चाहिए।

3. सांस्कृतिक उपादानों को प्रोत्साहन –

हमारी संस्कृति ने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिये हमें अनेक सशक्त माध्यम प्रदान किये हैं जिनमें तीर्थ, मेले, लोक कलायें तथा ऐतिहासिक स्थल प्रमुख है। इनको जितना अधिक प्रोत्साहन दिया जायेगा-राष्ट्रीय एकता उतनी ही सुदृढ़ होगी ।

  • पर्यटन को बढ़ावा।
  • शक्तिशाली केन्द्रीय शासन।
  • उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन।
  • फिल्म उद्योग।
  • केन्द्रीय सेवायें, केन्द्रीय विद्यालय।
  • देश भक्ति गीत, प्रहसन नाटक।
  • स्वैच्छिक संस्थाओं की अहम् भूमिका।
  • राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास।

स्काउट/गाइड का राष्ट्रीय एकता में योगदान

1. धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिये सर्वधर्म प्रार्थनाओं का आयोजन करना।
2. राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में योगदान करना।
3. देश के विभिन्न प्रदेशों के देश-गीत व लोक-गीत गाना।
4. अन्य प्रदेशों की भाषायें सीखना।
5. अधिक से अधिक पेन फ्रेन्ड्स’ बनाना।
6. विभिन्न धर्मों के ग्रन्थों को पढ़ना।
7. दूसरे प्रदेशों का भ्रमण कर विचारों का आदान-प्रदान करना।

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