शिविर के औजार और उनका प्रयोग (Camp Tools & Their Uses )

शिविर के औजार और उनका प्रयोग (Camp Tools & Their Uses )

शिविर जीवन स्काउटिंग/गाइडिंग का एक अभिन्न अंग है। इसमें उन्हें आवश्यक औजारों की आवश्यकता पड़ती है। कुछ प्रमुख आजार निम्नलिखित हैं:-

1.कुल्हाड़ी (Axe)
2.चाकू (Knife)
3.हथौड़ी (Hammer)
4.आरी (Saw)
5.खुपी (Spud)
6.प्लास (Player)
7.फावड़ा (Shovel)
8.सब्बल (CrowBar)
9.मुंगरी (Mallet)
10.रेती (File)
11.पेंचकस (ScrewDriver)

कुल्हाड़ी का प्रयोग

कुल्हाड़ी स्काउट/गाइड की परम मित्र है। किसी मूर्ख व्यक्ति के हाथ में कुल्हाड़ी उसकी शत्रु हो सकती है किन्तु स्काउट गाइड उसका सदुपयोग कर गर्व का अनुभव करते हैं। एक ओर वे इसका सही प्रयोग करना सीखते हैं, दूसरी ओर इसका पर्याप्त अभ्यास कर लेते हैं।
स्काउट गाइड कुल्हाड़ी का वजन लगभग 750 ग्राम तथा इसमें
प्रयुक्त लाठी की लम्बाई 50 से 55 से.मी. तक होती है। कुल्हाड़ी की
धार और सिरा एक सीध में होने पर सही चोट पड़ती है। मूठ ढीली
होने पर पच्चड़ लगा देना चाहिए।

कुल्हाड़ी की देखभाल

कुल्हाड़ी की धार तेज होनी चाहिए। धार लगाने के लिये उसे एक विशेष प्रकार के पत्थर (Grinding Stone) पर वृत्ताकार चलाते हुए दोनों तरफ से रगड़ना चाहिए।
कुल्हाड़ी की सम्भाल आवश्यक है। उसे चमड़े के खोल में रखना चाहिए। यदि चमड़े का खोल न हो तो उसे किसी पेड़ या खूटे पर गाड़ देना चाहिए। कुल्हाड़ी भूमि पर कदापि न फैकी जाय । स्काउट इसे अपनी पेटी पर बने निर्धारित स्थान पर लटकाते हैं।
कुल्हाड़ी का आदान-प्रदान करते समय सिरा स्वयं पकड़कर दूसरों को उसकी मूळ पकड़ाई जानी चाहिए। यदि कुल्हाड़ी ले जा रहे हों तो कन्धे पर धार पीछे की ओर बाहर को होनी चाहिए। हाथ में ले जाते समय स्कन्ध को पकड़कर धार (Edge) शरीर के विपरीत हो । कुल्हाड़ी को सुरक्षित रखने के लिए तेल युक्त कपड़े से उसके लोहे व लकड़ी को रगड़ देना चाहिए।

कुल्हाड़ी का प्रयोग

कुल्हाड़ी की पकड़ बायें हाथ में हो। दायाँ-बायाँ हाथ पकड़ (Grip) के ऊपर इस प्रकार हो कि उसे आवश्यकतानुसार ऊपर नीचे सरकाया जा सके। किसी वस्तु को काटते या फाड़ते समय अनावश्यक जोर लगाने की आवश्यकता नहीं। स्वयं कुल्हाड़ी का वजन ही पर्याप्त है। आवश्यकता होती है लक्ष्य पर ठीक चोट मारने की। काटते समय Vवी’ आकार के 45 अंश के कोण पर कटान करना चाहिए। यदि लकड़ी
फाड़नी हो तो नीचे से एक मोटी लकड़ी रख लेनी चाहिए ताकि कुल्हाड़ी की धार पत्थर या भूमि पर न लगे । यदि किसी बड़े लट्टे को फाड़ना हो तो बीच में पच्चर सरकाते हुए दरार बढ़ाते जाना चाहिए।

हथौड़ी

इसके चपटे भाग से कीलें ठोकी जाती हैं और दो नुकीले सिरों के मध्य-भाग से कीलें बाहर निकालने का काम लिया जाता है।

आरी

इसके एक ओर दांते बने होते हैं जिससे लकड़ी काटी जाती है। इसकी सहायता से सीधी रेखा में सफाई से लकड़ी काटी जा सकती है।

फावड़ा

भूमि छीलने, खोदने व नाली बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है।

खुरपी

भूमि समतल करने और घास छीलने में इसका प्रयोग किया जाता है।

सब्बल

भूमि में खम्भे गाड़ने के लिये इससे गड्ढे बनाये जाते हैं।

मुंगरी

तम्बू की खूटियाँ गाड़ने व गैजेट्स में इसका प्रयोग किया जाता है।

रेती

आरी पर धार लगाने के लिये इसका प्रयोग होता है।

पेंचकस

पेंच वाले कील कसने या खोलने में इसका प्रयोग होता है। स्काउट/गाइड उक्त औजारों को भूमि पर यों ही नहीं फेंक देते वरन इन्हें रखने के लिए गैजेट्स बना लेते हैं।

प्लास

किसी चीज को पकड़ने, मोड़ने, कसने, करंट वाले तार को काटने, छीलने, लपेटने आदि के कार्य आता है।

चाकू (Knife)

चाकू स्काउट/गाइड का परम मित्र है। चाकू अनेक प्रकार के होते हैं। किन्तु स्काउट/गाइड निम्नलिखित तीन प्रकार के चाकू प्रयोग करते हैं:-

1. स्काउट चाकू (ScoutKnife)
2. डेगर या सीथ चाकू (Daggeror Seath Knife)
3. जैक या क्लैस्प चाकू (JackorClasp knife)

1. स्काउट चाकू –

यह बहुउद्देश्यीय होता है। इसमें तीन फल एक धारदार चाकू, एक पेंचकस खोदने व बोतल के ढक्कन खोलने के फल होते हैं। स्काउट इसे अपनी पेटी में बने छल्ले पर आसानी से लटका लेते हैं।

2. डैगर या सीथ चाकू –

इस चाकू को मोड़ा नहीं जा सकता। इसके बाहर चमड़े का खोल चढ़ा होता है। इसका प्रयोग गैजेट्स की लकड़ी काटने, छीलने तथा सब्जी काटने में किया जाता है। इसे स्काउट पेटी पर लटकाया जा सकता है।

3. जैक नाइफ –

इसे खोला तथा मोड़कर बन्द किया जा सकता है। यह फल, सब्जी आदि काटने के काम आता है

सावधानियाँ

चाकू के बारे में निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए:-

  • जोड़ों पर मशीन का तेल डालते रहना चाहिए।
  • चाकू पर किसी उपयुक्त चीज से धार लगाते रहना चाहिए। धार लगाते समय दोनों तरफ बारी-बारी से गोलाकार रगड़ना चाहिए।
  • जैक नाइफ को खोलते व बन्द करते समय दोनों हाथों का प्रयोग करना चाहिए तथा खोलते व बन्द करते समय पर्याप्त सावधानी रखनी चाहिए।
  • चाकू से काटते या छीलते समय हैण्डिल को पूरे हाथ से मजबूती से पकड़ना चाहिए तथा पूरे हाथ की शक्ति लगानी चाहिए।
  • चाकू को किसी को देते समय हैण्डिल पकड़ना चाहिए या बन्द करके देना चाहिए।

स्काउट में रस्सी का महत्व


रस्सी स्काउट/गाइड का एक अच्छा मित्र है। अतः उसकी सम्पूर्ण जानकारी होनी उनके लिये अत्यावश्यक है। रस्सी-सूत, जूट, नारियल, नाॅयलाॅन, तार, टेरिलीन, सन आदि की बनती है। किन्तु सन की रस्सी मजबूत ब कोमल होती है।
रस्सी को फीट या कदम में नापा जाता है रस्सी परिधि से उसकी मोटाई आकि जाती है अर्था्त 3‘‘ मोटी रस्सी वह कहलाती है। जिसकी परिधि 3‘‘ और व्यास 1‘‘ हो। 1‘‘ से कम की परिधि की रस्सी को लड़ कहा जाता है।

3‘‘ की रस्सी की मजबूती होगी 18 सीडब्लूटीएस।

साधारणतया रस्सी तीन प्रकार की होती है

  • दुलड़ी रस्सी
  • तिलड़ी रस्सी
  • चैलड़ी रस्सी

प्रत्येक स्काउट/गाइड अपने पास तीन मीटर की रस्सी रखता है जिसे जीवन रक्षक डोरी कहा जाता है। इससे वह विविध कार्य लेते है।

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